भारतीय रेल का सबसे डरावना स्टेशन कौन सा है?

भारतीय रेल का सबसे डरावना स्टेशन: हम इसी लेख में आपको बताएंगे कि भारत के सबसे डरावना रेलवे स्टेशन कौन सा है , जहां पर कुछ ना कुछ अजीब सी घटनाएं घटनाएं होती रहती है। जो सामान्य घटनाओं से बिल्कुल अलग होता है, जहां पर लोग रात में जाने से डरते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा की दिखने में इतना अच्छा स्टेशन एक भूतिया स्टेशन भी हो सकता है। 

भारतीय रेल का सबसे डरावना स्टेशन

1. बरोग स्टेशन, शिमला

बरोग स्टेशन, शिमला
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शिमला में बरोग रेलवे स्टेशन, बरोग सुरंग के समीप है। इस सुरंग का निर्माण करवाया था कर्नल बरोग ने। कहा जाता है कि यहां एक इंजीनियर ने अन्य कर्मचारियों के सामने अपमानित होने के बाद आत्महत्या कर ली थी। जब वह सुरंग का निरीक्षण करने जा रहा था, तब उसने खुद को गोली मार ली थी। बाद में उसकी लाश को उसी सुरंग के नजदीक दफ़ना किया गया था। कहा जाता है की सुरंग के इर्द-गिर्द उसकी मौजूदगी आज भी है।

 

2. रवींद्र सरोबर मेट्रो स्टेशन, कोलकाता

कोलकाता का रवींद्र सरोबर मेट्रो स्टेशन भी भूतिया स्टेशनों में एक है। कहते हैं कि यहां के ट्रैक पर कूद कर आत्महत्या करने वालों की आत्मा यहां घूमती रहती है। लोग मानते हैं कि अगर आपको इस मेट्रो लाइन की किसी आखरी ट्रेन में सफ़र करना पड़ जाए, तो आपको डरावनी और अंजानी आवाज़ें सुनने को मिल सकती हैं।

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3. द्वारका सेक्टर 9 मेट्रो स्टेशन , दिल्ली

लोग मानते हैं कि दिल्ली के द्वारका सेक्टर 9 के मेट्रो स्टेशन के आस-पास एक भूतनी का डेरा है। यह सफेद साड़ी पहनती है। कभी-कभी तो यह भूतनी कारों का पीछा भी करती है। उनके दरवाज़े खटखटाती है और बात न सुनने पर थप्पड़ तक मार देती है।

4. चित्तूर रेलवे स्टेशन, आंध्र प्रदेश

चित्तूर रेलवे स्टेशन ‘न्याय की तलाश’ में भटकने वाली आत्मा सी0आर0पी0एफ0 अधिकारी हरि सिंह के लिए कुख्यात है। इस अधिकारी की हत्या 31 अक्टूबर को केरल एक्सप्रेस में ड्यूटी के वक़्त कर दी गई थी। बताया जाता है कि हरि सिंह को पिटाई के बाद गंभीर हालत में चित्तूर रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन से नीचे धकेल दिया गया था। 10 दिन तक अस्पताल में जूझने के बाद उनकी मौत हो गई थी।

5. लुधियाना रेलवे स्टेशन

लुधियाना रेलवे स्टेशन की अपनी अनोखी कहानी है। आरक्षण केन्द्र के एक कोने में छोटा सा कमरा है, जिसमें कभी कम्प्युटर आरक्षण प्रणाली के अधिकारी सुभाष नौकरी करते थे। उनको अपनी नौकरी से बहुत लगाव था। एक दिन इसी छोटे कमरे में सुभाष का देहान्त हो गया। अब लोगों का मानना है कि इस कमरे के आसपास से गुजरने पर सुभाष की आत्मा पीठ पर चिकोटी काटती है। लोग कहते हैं कि सुभाष को अपनी नौकरी से प्रेम था, इसलिए उनकी आत्मा नहीं चाहती कि उनकी कुर्सी पर कोई और बैठे। यही वजह है कि वह बिना छुट्टी लिए रोज काम पर आ जाते हैं। इस कमरे को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है।

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