राष्ट्रपति भवन का शानदार इतिहास जानिए | Rashtrapati Bhavan history in hindi

Rashtrapati Bhavan यानि के राष्ट्रपति भवन भारत के राष्ट्रपति का सरकारी आवास है और राष्ट्रपति आवास के बारे में एक सबसे खास बात जिस बारे में बात की जा सकती है वो ये है कि आपको ये बात सुनने में अलग लगेगी कि भारत के राष्ट्रपति , राष्ट्रपति भवन के मुख्य कमरे में नहीं रहते बल्कि वो अतिथि कक्ष में रहते है और इसके पीछे कारण ये है कि भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल श्री सी राजगोपालाचार्य को यहां का मुख्य शयन कक्ष नहीं जमा और उन्होंने अतिथि कक्ष में रहने का फैसला किया जिसके बाद उनके बाद के राष्ट्रपति भी यही परम्परा को निभाते हुए आ रहे है तो चलिए Rashtrapati Bhavan history के बारे में भी कुछ बात करते है –


राष्ट्रपति भवन का शानदार इतिहास जानिए | Rashtrapati Bhavan history in hindi

Rashtrapati Bhavan history in Hindi

Rashtrapati Bhavan के इतिहास के बारे में बात करने से पहले कुछ इसके बारे में बेसिक जानकारियों के बारे में बात कर लेते है जो आपको पता होनी चाहिए वो ये कि इस भव्य ईमारत में कुल 340 कमरे है और यह दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा निवास है जो सरकारी है | भवन के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं के बराबर किया गया है और इसके निर्माण में 700 मिलियन ईंटे और करीब 85000 घन मीटर पत्थर का इस्तेमाल हुआ है | Rashtrapati Bhavan को 1950 तक वायसराय हाउस कहा जाता था | राष्ट्रपति भवन के इतिहास की बात करें तो इसका निर्माण 1912 में शुरू हुआ और 1929 में इसका निर्माण पूरा हुआ यानि के इसे बनाने में पूरे 17 साल का समय लगा | इसे बनाने के लिए  ब्रिटिश वास्तुकार सर एड्विन लैंडसियर लूट्यन्स को काम सौंपा गया |


Rashtrapati Bhavan के बारे में बहुत सी चीजे है जो इसे खास बनाती है जैसे कि इस भवन के पीछे एक मुग़ल गार्डन है जो मुग़ल और ब्रिटिश वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है | केवल यह बगीचा ही 13 एकड़ में फैला हुआ है और यंहा फूलों की एक से बढ़कर एक बेहतरीन किस्मे है जिसमे कुछ विदेशी फूलों की किस्मे भी शामिल है | यह हर वर्ष लोगो के लिए केवल फरवरी-मार्च के मध्य खुलता है जिसमे आम लोग भी जाकर विजिट कर सकते है | Rashtrapati Bhavan के निर्माण में करीब 29 हजार लोगो ने काम किया था | 1911 में जब भारत की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली में शिफ्ट किया गया तब इसे बनाने की जरूरत एडमिनिस्ट्रेशन को लगी और उन्होंने इसे बनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया | हालाँकि ज्यादा दिन वो लोग इसमें रह नहीं सके क्योंकि 1947 में भारत के आजाद होने के बाद Rashtrapati Bhavan स्वतंत्र भारत में आ गया और फिर 1950 में गणतंत्रता के बाद इसमें भारत के राष्ट्रपति रहने लगे और इसका नाम वायसराय हाउस से बदल कर राष्ट्रपति भवन हो गया |


Rashtrapati Bhavan में आज कुल 750 कर्मचारी इसकी देख रेख के लिए काम करते है और जिसमे कि 245 सचिवालय में कार्यरत है | इस भवन के अशोका हाल में मंत्रियों के शपथग्रहण जैसे प्रोग्राम होते है साथ ही भवन में  ड्राइंग रूम,  खाने के कमरे,  बैंक्वेट हॉल,  टेनिस कोर्ट, पोलो ग्राउंड और एक क्रिकेट का मैदान और एक संग्रहालय शामिल है जो इस स्थान के बेहतरीन आकर्षण हैं। साथ ही हर शनिवार को यंहा “ चेंज ऑफ़ गार्ड “ नाम का समारोह भी होता है जो सुबह दस बजे शुरू होता है और उसे देखने के लिए कोई भी जा सकता है उसे केवल अपना पहचान पत्र दिखाना होता है | Rashtrapati Bhavan के मुग़ल गार्डन के बारे में एक और खास बात ये है कि यंहा विविध प्रकार के फूलों की कमाल की बहार आप देख सकते है । अकेले गुलाब की ही 250 से भी अधिक किस्में हैं। मुगल गार्डन के बारे में सबसे पहले  लेडी हार्डिंग  ने सोचा था । उन्होंने श्रीनगर में निशात और शालीमार बाग देखे थे, जो उन्हें बहुत भाये। बस तभी से मुगल गार्डन बनाने की बात उनके मन में बैठ गयी थी और एक बात कि  भारत के अब तक जितने भी राष्ट्रपति इस भवन में निवास करते आए हैं, उनके मुताबिक इसमें कुछ न कुछ बदलाव जरूर हुए हैं और उन्होंने करवाए है । प्रथम राष्ट्रपति, डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद ने इस गार्डन में कोई बदलाव नहीं कराया लेकिन उन्होंने इस खास बाग को जनता के लिए खोलने की बात कही कि क्यों नहीं यह गार्डन जनता के लिए भी कुछ समय के लिए खोला जाए । उन्हीं की वजह से प्रति वर्ष मध्य-फरवरी से मध्य-मार्च तक यह आकर्षक गार्डन आम जनता के लिए खोला जाता है।


तो ये है Rashtrapati Bhavan history in hindi और इस बारे में अधिक जानकारी या सलाह के लिए आप हमे ईमेल कर सकते है और हमसे hindi history updates पाने के लिए आप हमे फेसबुक पर फॉलो कर सकते है या फिर नीचे दिए गये घंटे के निशान पर भी क्लिक कर सकते है |



*

एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने