एलेफेन्टा की गुफाओं का शानदार इतिहास जानिए | Elephanta Caves History In Hindi

Elephanta caves यानि के एलेफेंटा की गुफाएं अजन्ता और एल्लोरा की गुफाओं की तरह ही एक ऐतिहासिक गुफाओं का समूह है जो महाराष्ट्र में है और लोकेशन की बात करें तो यह मुम्बई से बहुत अधिक दूर नहीं है यह मुंबई बंदरगाह के ( करीब 10 किमी दूर पूर्व में ) स्थित है और इस लोकेशन को एलीफांटा आइलैंड या घारापुरी (शाब्दिक रूप से “गुफाओं का शहर”)  के नाम से जानते है  तो चलिए इसी बारे में कुछ और बात करते है और elephanta caves history के बारे में कुछ बातें जानते है –


एलेफेन्टा की गुफाओं का शानदार इतिहास जानिए

एलेफेन्टा की गुफाओं का शानदार इतिहास जानिए | Elephanta Caves History In Hindi

एलेफेंटा की गुफाएं देखा जाये तो दो धर्मो के समूह की गुफाएं है जिसमे पांच हिन्दू गुफाओं का एक बड़ा समूह है जिसमें भगवान् शिव से जुडी ऐतिहासिक मूर्तियाँ मिलती है और दूसरा समूह अपेक्षाकृत छोटा है जिसमे 2 गुफाओं का समूह है जिसमे बौद्ध धर्म और उनके अगुओं से जुडी कुछ कलाकृतियाँ मिलती है | elephanta caves में मिलने वाली मूर्तियाँ चट्टान से तराशी गयी मूर्तियाँ होती है | गुफाओं के निर्माण के तरीके को जो इन गुफाओं में देखने को मिलता है उसे  rock cut architecture कहते है जिसका मतलब होता है कि एक मजबूत चट्टान को खुदाई के माध्यम से अपनी मनचाही आकार और बिल्डिंग के रूप में बदला जाता है | गुफाओं के काल की बात करें तो इसी तकनीक को ध्यान में रखते हुए इनका काल  5 वीं और 8 वीं शताब्दी के बीच का आंका गया है |


एलेफेन्टा की गुफाओं का शानदार इतिहास जानिए | Elephanta Caves History In Hindi

elephanta caves ठोस बेसाल्ट चट्टान से बनाई गई हैं सभी गुफाओं को मूल रूप से अतीत में चित्रित किया गया था यानि के यंहा बहुत से चित्र और उकेरी गयी आकृतियाँ थी जिनके अब केवल अवशेष मात्र बचे है | 1534 में पुर्तगाली शासन शुरू होने से पहले मुख्य गुफा 1 जो है वो हिन्दू लोगो के लिए पूजा अर्चना के लिए मुख्य स्थल हुआ करती थी लेकिन पुर्तगाली शासन शुरू होने के बाद चूँकि गुफाओं को काफी क्षति पहुंची जिसकी वजह से काफी उपेक्षा के वर्षों के बाद 1970 में पुनर्निर्मित किया गया था, और कलाकृति को सुरक्षित रखने के लिए 1987 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल को नामित किया गया था।


हालाँकि elephanta caves के बनने के इतिहास के बारे में बात करें तो स्थानीय परम्पराएँ यह मानती है कि ये गुफाएं मानवनिर्मित नहीं है और इन्हें बनाने का श्रेय भारतीय महाकाव्य महाभारत के नायकों और बनसुर जो कि  शिव का दानव भक्त के रूप में जाना जाता है को सम्मिलित रूप से दिया जाता है हालाँकि यह बात भी आपको ध्यान में होनी चाहिए कि ऐसी किसी भी घटना से जुड़े शिलालेख जो इन गुफाओं के निर्माण से जुडी किसी जानकारी के बारे में बताते हो इस द्वीप पर नहीं मिले है | elephanta caves में पुरातात्विक खुदाई ने 4th century AD के कुछ क्षत्रप सिक्कों का पता लगाया है। ज्ञात इतिहास की बात करें तो  635 ईस्वी में, नौसैनिक युद्ध में बादामी चालुकस सम्राट पुल्केसी द्वितीय (60 9 642) ने कोंकण के मौर्य शासकों को हराया था और ऐसा माना जाता है कि उस समय में elephenta को पुरी या पुरिका कहा जाता था जो कोंकण मोर्यों के लिए राजधानी की तरह था | हालाँकि कुछ इतिहासकार यह कहते है कि यह गुफाएं उसी समय यानि के 6th Century AD की बनी हुई है और इनका निर्माण कोंकण मौर्यों ने ही किया है लेकिन इस दावे का बार बार खंडन किया है क्योंकि यह मानना जरा मुश्किल है कि कोंकण मौर्यों ने इस तरह के पेचीदा और असाधारण खुदाई वाले काम को अंजाम दिया हो और ना ही वो इस तरह की उच्च गुणवत्ता वाली मूर्तियाँ बनाने का प्रयास कर सकते थे |


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